
रिपोर्ट: हिमांशु सेहगल, विशेष संवाददाता
हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया चैनलों पर एक सनसनीखेज दावा वायरल हुआ: “उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुस्लिम हकीम के ठिकानों से 3,000 बंदूकें, 50,000 कारतूस और भारी मात्रा में घातक हथियार बरामद किए।” इस खबर को बड़े-बड़े हथियारों के ढेर की तस्वीरों और वीडियो के साथ साझा किया गया। लेकिन जब हमारी टीम ने जांच की, तो सामने आई असली कहानी बिल्कुल अलग थी।
असली बरामदगी
26 जून 2025 को लखनऊ पुलिस ने मलिहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हकीम सलाउद्दीन उर्फ लाला के घर पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने बरामद किया:
3 पिस्टल (.32 बोर)1 देसी पिस्टल (.315 बोर)2 देसी पिस्टल (.22 बोर)1 राइफल (.22 बोर)7 एयर गनलगभग 140 जिंदा कारतूस हथियार बनाने के उपकरण, हिरण की खाल (वन्यजीव अपराध)
यह बरामदगी गंभीर थी, लेकिन वायरल किए गए दावों की तुलना में कहीं कम थी।
वायरल दावा और हकीकत
छापेमारी के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने लगीं। कई पोस्ट्स और पोर्टल्स ने दावा किया कि पुलिस ने 300 से 3,000 हथियार और 50,000 कारतूस बरामद किए। इस दावे को समर्थन देने के लिए एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें हजारों हथियार दिख रहे थे।
हमारी जांच में सामने आया कि यह वीडियो 4 साल पुराना है और अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा कब्ज़ाए गए हथियारों का है। इसका लखनऊ की बरामदगी से कोई संबंध नहीं है।
क्यों नहीं मिलते झूठे आंकड़े?
3,000 बंदूकें और 50,000 कारतूस अगर सच होते, तो उन्हें ले जाने के लिए कई ट्रक लगते।
लखनऊ पुलिस की आधिकारिक लिस्ट में सिर्फ दर्जन भर हथियार और लगभग 140 कारतूस दर्ज हैं।
वायरल वीडियो और दावे पूरी तरह भ्रामक निकले।
मीडिया की भूमिका
यह मामला दिखाता है कि जिम्मेदार पत्रकारिता कितनी अहम है। सनसनीखेज दावे न केवल भरोसा तोड़ते हैं, बल्कि समाज में तनाव भी फैला सकते हैं। तथ्यों की पुष्टि किए बिना ख़बरें चलाना ग़लत है।
हमारी रिपोर्ट यह साबित करती है कि किसी भी वायरल खबर पर यक़ीन करने से पहले हमेशा आधिकारिक रिपोर्ट्स और विश्वसनीय फैक्ट-चेक देखना जरूरी है।
